अाजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है…

अाजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है।
भीगना है,प्यार की बरसात का रुख़ किस तरफ है।
मैं ढूँढ़ता सारे जहाँ में खुशबुऐं जिस फूल की,
कोई बतायेगा? ‘चमन के नाज़’ का रुख़ किस तरफ है।
ना शिक़ायत,ना गिला,नाराज़गी है।
प्यार की सरगम सुनाती जिन्दगी है।
चल पड़ेगा बाँवरा मन उस तरफ,
महबूब के दीदार का सुख जिस तरफ है।
आजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है।

Categories: Poetry

5 Comments

akshay · June 16, 2018 at 3:45 pm

Well said buddy!

chris · June 16, 2018 at 5:49 pm

Lovely!

Suraj Tamta · June 21, 2018 at 10:31 am

Very nice, keep it up.

lifevision24 · June 23, 2018 at 9:44 pm

Very nice!

John · August 19, 2018 at 5:56 pm

Interesting stuff to read. Keep it up.

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