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तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो

तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो

सहजता से भूल पाना हो रहा मुमकिन तुम्हें,
तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो।
मगर तुम प्रेम की लावर्ण्यताओं के लिये सच्ची समर्पित,
भावनाओं का क़तल अविराम करती हो।
जहाँ पल-पल जरूरत है सुधा की,कंठ वो प्यासे रखे,
दुत्कारती बंजर जमीनों पर बरसती हो।
मगर सच्चा हृदय पैरों तले,सिरमौर बैरी को रखे,
उस पर स्वयं सच्ची महोब्बत को तरसती हो।
प्रिये! तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो..

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