घुमक्कड़ी

घुमक्कड़ी मैख्व़ार मैं,जरा अलग हूँ… एक शराब,बूंद-बूंद मिलकर बरसती है मिरे पैमाने में…समन्दर हो जाती है..मैं उसके नशे में चूर रहता हूँ। मैं सस्ती,मस्ती नहीं पीता..मेरी मस्ती, परम का प्रसाद है,जिसके खजाने प्रकृति मे सरेआम बिखरे पडे हैं। मेरी यायावरी मुझे उन तक पहुँचाती है…इक नया कलेवर मुझे ओढ़ाती है..घुमक्कड़ी मेरी फितरत में शामिल है..तो … Read more