नदी का एक छोर

नदी का एक छोर नदी का एक छोर सुहाना, याद दिलाता है एक अफसाना, धुमिल होती कुछ यादें पुरानी और वो तुम्हारा शर्माना, हाँथ पकड़ना और मंद-मंद मुस्काना, जैसे दोहरा रहे हो, बचपन का वो समय पुराना, हम आज भी खिचे चले आते है इस डगर, चाहे साथ नहीं अब तुम्हारा, संजो कर रखते है … Read more