देवभूमि गाँव यात्रा – बिशुंग

गाँव का नाम –बिशुंग
जिला –चम्पावत
निकटतम बाज़ार –लोहाघाट
मुख्य जातियाँ- मेहरा, फर्त्याल, करायत, ढेक, मुरारी

bishung champawat

देवभूमि उत्तराखंड के चम्पावत जिले में स्थित बिशुंग गाँव एतिहासिक व पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण गाँव है | लोहाघाट से कुछ ही दूरी पर स्थित यह गाँव पूर्व से ही वीरों का गाँव रहा है आज भी इस गाँव के हर परिवार से कोई न कोई भारतीय सेना में  सेवा देते हुए अवश्य मिल जायेगा इसीलिए इसे फौजियों का गाँव कहना भी उचित है | आजादी की लडाई के समय ”कुमाऊ का शेर” कहलाने वाले वीर “कालू सिंह मेहरा” की पुण्यभूमि भी यही है |

एतिहासिक दृष्टिकोण से यह उत्तराखंड के सबसे पुराने गाँव में से एक हैं, माना जाता है की भगवान् श्री कृष्णा के समय में बाड़ासुर नाम का राजा इसी गाँव से सम्बंधित है | आज भी गाँव के सबसे ऊँचे टीले पर बाड़ासुर का किला विद्यमान है , जो अब  लोगों  के लिए एक पर्यटन स्थल है| इस किले के बीच से कुछ सीडियां अन्दर की तरफ को गयी है मन जाता है की पूर्व के समय में यह एक बड़ी सुरंग थी जिसका उपयोग आपातकालीन समय म किया जाता था |

गाँव का अधिकांश भाग समतल होने की वजह से यह खेती के लिए बहुत ही उपयुक्त गाँव हैं | गाँव के नाम का भी एक गहरा अर्थ है , बिशुंग –यानि की बीस संग अर्थात यह 20 गाँव का एक समूह है जो लोगो के आपसी प्रेम व एकता के कारण एक साथ बिशुंग के नाम से जाना जाता है |

मुख्य आकर्षण-

१-बिशुंग गाँव में कढ़ाई मेला काफी प्रसिद्ध है इसे देखने आसपास के छेत्रों के काफी लोग आते हैं

२- बाड़ासुर का किला इस गाँव का मुख्य आकर्षण से यह पर दूर-दूर से लोग आते हैं जमीन से अन्दर की तरफ जाती हुई सुरंग सचमुच  रोमांचित कर देती है |

 

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