ruki ruki si saanse akhilesh sorari bugyal valley poet uttarakhand india

रुकी-रुकी सी साँसें..

रुकी-रुकी सी साँसें.. रुकी-रुकी सी साँसें आ रही हैं इस कदर.. मरा-मरा सा कोई जी रहा हो जैंसे। अनवरत अश़्क यूं आँख से बह गये.. समन्दर में सुराख़ हुआ हो जैंसे। मेरी बातों से धुआँ सा उठता है क्यों.. मेरे भीतर कोई शख़्स राख़ हुआ हो जैंसे।

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तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो

तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो सहजता से भूल पाना हो रहा मुमकिन तुम्हें, तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो। मगर तुम प्रेम की लावर्ण्यताओं के लिये सच्ची समर्पित, भावनाओं का क़तल अविराम करती हो। जहाँ पल-पल जरूरत है सुधा की,कंठ वो प्यासे रखे, दुत्कारती बंजर जमीनों पर Read more…

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मन-मोहक मुस्कान तुम्हारी

मन-मोहक मुस्कान तुम्हारी कौंल पद्म सी,कुंद कुसुम सी श्वेत शुभ्र शोभित सुकुमारी।   मन-मोहक मुस्कान तुम्हारी।                 मधुमय किसलय फूट पडेंगे                अलि मधुरस पर टूट पडेंगे।              तुम्हें देख हे!बाग दुलारी। Read more…

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आजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है

आजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है… आजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है।भीगना है,प्यार की बरसात का रुख़ किस तरफ है।मैं ढूँढ़ता सारे जहाँ में खुशबुऐं जिस फूल की,कोई बतायेगा? ‘चमन के नाज़’ का रुख़ किस तरफ है।ना शिक़ायत,ना गिला,नाराज़गी है।प्यार की सरगम सुनाती जिन्दगी है।चल पड़ेगा बाँवरा मन Read more…

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ये शादाब चेहरा ये शफ्फाक आँखे

ये शादाब चेहरा ये शफ्फाक आँखे ये शादाब चेहरा ये शफ्फाक आँखे।ये जुल्फें घनेरी ये मुस्कान तेरी।कहीं दिल में हलचल सी तो हो रही है।कहीं भावनायें बही जा रही है।कहीं तो कुमुद सी कली खिल रही है।कहीं बूंद बारिश धरा मिल रही है।तुम्हें देख धडकन धड़कते-धड़कते।कहीं जिस्म की तोड दे Read more…

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अलि-अवली मधुरस पी जायेगी सारा

अलि-अवली मधुरस पी जायेगी सारा अलि-अवली मधुरस पी जायेगी सारा, मधु-मुकुल! तुम्हें छिपकर रहना होगा। हे! कुसुम कली,तुम जिस मधुकर के लिये बनी, इन्तज़ार में उस मधुकर के रहना होगा। पुलक तुम्हारी दशों दिशाओं महक रही है, तुम्हें देख,जग उरा-कामिनी बहक रही है। निज उर का उद् गार तुम्हें भी Read more…

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