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कभी जब वक़्त मिले

कभी जब वक़्त मिले… ठोस शहर की गुमनाम दीवारे छोड़ कल कल बहती नदिओं की तरफ जाना गली कूंचें बहकी हुई सड़के छोड़ छोटी छोटी पग डंडिओ की तरफ जाना कभी जब वक़्त मिले तो गांव की तरफ जाना कभी जब वक़्त मिले… भीड़ की आनन् फानन छोड़ फुल पंखुडिओ के महकते तन की तरफ … Read more

चाँद सजी रात का

चाँद सजी रात का पृष्ठ इक पलट गया, जिन्दगी किताब का।धार कलम सुर्ख स्याह रंग की दवात का।सूर्य छिपा लाल चुनर ओढ़ क्षितिज सांझ का।मौन मुखर हो रहा है चाँद सजी रात का। जो बज उठे सितार प्राण तार में विलीन के।लहर उठी कि ले चली तले जमीन छीन के।समीर सी विरल हुई कि नीर … Read more

हे पथिक तू चलता जा!

हे पथिक तू चलता जा हे पथिक तू चलता जा, ये राह तुझे ले जाये जहाँ,न मदिरालय की खोज में, न मनमौजो की मौज में,बस तू चलता जा, देख डगर ये हुई पुरानी,आज है यारी कल बन जाएगी ये एक कहानी,तू अपनी बातें लिखता जा,हे पथिक तू चलता जा, कई कागज़ यु कोरे है, धुल … Read more

नदी का एक छोर

नदी का एक छोर सुहाना, याद दिलाता है एक अफसाना, धुमिल होती कुछ यादें पुरानी और वो तुम्हारा शर्माना, हाँथ पकड़ना और मंद-मंद मुस्काना, जैसे दोहरा रहे हो, बचपन का वो समय पुराना, हम आज भी खिचे चले आते है इस डगर, चाहे साथ नहीं अब तुम्हारा, संजो कर रखते है इन लहरों को अक्सर, … Read more

रुकी-रुकी सी साँसें..

रुकी-रुकी सी साँसें.. रुकी-रुकी सी साँसें आ रही हैं इस कदर..मरा-मरा सा कोई जी रहा हो जैंसे। अनवरत अश़्क यूं आँख से बह गये..समन्दर में सुराख़ हुआ हो जैंसे। मेरी बातों से धुआँ सा उठता है क्यों..मेरे भीतर कोई शख़्स राख़ हुआ हो जैंसे।

तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो

तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो सहजता से भूल पाना हो रहा मुमकिन तुम्हें,तुम रूठकर मुश्किल मेरी आसान करती हो।मगर तुम प्रेम की लावर्ण्यताओं के लिये सच्ची समर्पित,भावनाओं का क़तल अविराम करती हो।जहाँ पल-पल जरूरत है सुधा की,कंठ वो प्यासे रखे,दुत्कारती बंजर जमीनों पर बरसती हो।मगर सच्चा हृदय पैरों तले,सिरमौर बैरी को रखे,उस पर … Read more

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