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बब्लीधार की जूली

मिलम (ग्लेशियर) यात्रा के बेहद खूबसूरत पड़ाव ‘बब्लीधार’ में हमारा मिलन हुआ…तुम अपनी दो सहेलियों संग पथरीले खडंजे में बड़ी नजाक़त के साथ बैठी थी..और मैं सामने इक झोपड़े के अांगन में लगी बेंच में यार-दोस्तों संग बैठकर पहाड़ी चाय Read more…

By Akhilesh Sorari, ago
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मानव संस्कृति में हजारों साल पहले से ही ‘योग’ हमारी दैनिक जीवन शैली का हिस्सा रहा है। योग एक अत्यन्त प्राचीन और कारगर तकनीक है जो मानव को उसके ऊँचे से ऊँचे आयामों,क्षमताओं और सम्भावनाओं तक ले Read more…

By Akhilesh Sorari, ago
Poetry

अाजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है

अाजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है… अाजकल श़हजाद का रुख़ किस तरफ है। भीगना है,प्यार की बरसात का रुख़ किस तरफ है। मैं ढूँढ़ता सारे जहाँ में खुशबुऐं जिस फूल की, कोई बतायेगा? ‘चमन के नाज़’ का रुख़ किस Read more…

Poetry

ये शादाब चेहरा ये शफ्फाक आँखे

ये शादाब चेहरा ये शफ्फाक आँखे ये शादाब चेहरा ये शफ्फाक आँखे। ये जुल्फें घनेरी ये मुस्कान तेरी। कहीं दिल में हलचल सी तो हो रही है। कहीं भावनायें बही जा रही है। कहीं तो कुमुद सी कली खिल रही Read more…

Culture Stories

उत्तराखंडी शादी – शुद्ध पहाड़ी प्रेम

उत्तराखंडी शादी – शुद्ध पहाड़ी प्रेम शादी शब्द सुनते ही दिमाग में कई कहानिया बनने लगती हैं | आजकल पहले प्रेम कहानी होती है, फिर परिवारों का मिलना जुलना होता है, फिर शादी होती है , लेकिन किसी जमाने में Read more…

By Yogesh Sorari, ago
Poetry

अलि-अवली मधुरस पी जायेगी सारा

अलि-अवली मधुरस पी जायेगी सारा अलि-अवली मधुरस पी जायेगी सारा, मधु-मुकुल! तुम्हें छिपकर रहना होगा। हे! कुसुम कली,तुम जिस मधुकर के लिये बनी, इन्तज़ार में उस मधुकर के रहना होगा। पुलक तुम्हारी दशों दिशाओं महक रही है, तुम्हें देख,जग उरा-कामिनी Read more…

By Akhilesh Sorari, ago
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